गर्भावस्था के बारे में कुछ भूले ,जो नहीं होनी चाइये

गर्भावस्था के बारे में कुछ भूले ,जो नहीं होनी चाइये


विग्ज्ञान व चिकत्सा तमाम नयी जानकारियों के प्रकाश में आने के बावजूद आज भी समाज में आमतौर पर कुछ ऐसे मूर्खतापूर्ण परिपाटियाँ प्रच्चलित है. जिनका न केवल माँ व् बच्चे के स्वस्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। बल्कि बच्चो की जान खतरे में पड जाती है। या बच्चे को आजीवन दुर्बलता और बीमारिया घेरे रहती है।
आइये जाने ,ये भूले क्या है।

1. पहली भूल -यह समझना की आराम के नाम पर गर्भणी को हर तरह का काम -धाम छोड़कर सुस्त पड़े रहना चाइये।
जबकि सोच तोह यह है की भारी वजन उठाने जैसे कामो को छोड़कर रोजमर्रा के बाकि काम माँ और बच्चा -दोनों के स्वस्थ्य के लिए फयदेमंद होते है।

2. दूसरी भूल - यह समझना की गार्भिणी  को अपने भोजन की मात्रा दुगुनी क्र देनी चाइये और दूध पिलाने वाली माँ को खूब गरिस्ट भोजन करना चाइये।
जबकि ज्यादा खाने से पाचन सुचारु रूप से नहीं होता है. और कब्ज़ जैसे बीमारिया गर्भ में पलते बच्चे पर बुरा असर डालती है। गरिस्ट व दुष्पाच्य भोजन करने से दूध ख़राब हो जाता है। और दूध के परवाह में भी कमी आ जाती है। माँ को भोजन में हलके व  सुपाच्य पर्दार्थ लेने चाइये।

3. तीसरी भूल - प्रसव के तीन दिन बाद तक सिसु को स्तनपान नहीं कराना चाइये।
जबकि सिसु के चूसने से ही  दूध का परवाह आरम्भ होता है। और प्रशव के बाद प्रथम दिन ही स्तनपान न करने से परवाह में धीमापन आ जाता है।

4. चौथी  भूल - यह समझना की प्रशव के तुरंत बाद यदि स्तन से दूध नहीं आता तो बच्चे को कुछ न कुछ ऊपरी आहार देना जरुरी है।
बच्चे को एक आध बार पानी देना तोह ठीक है। लेकिन आहार कदापि नहीं देना चाइये। बच्चा स्तन से कुछ न कुछ चूस सके तब भी कोई हर्ज नहीं है.

5. पांचवी भूल - यह समझना की यदि प्रसव के बाद तीन चार दिनों में ढीढ नहीं उतरा ,तो फिर उतरेगा नहीं।
एक सप्ताह तक दिन में 3-4 बार सिसु को स्तन से दूध देने से दूध प्रवाहित होने लगता है। माता की चिंता ही दूध के परवाह पर बुरा असर डालती है.

6. छठी भूल - यह समझना की गाय के दूध में शक्कर ,पानी या बार्ली वाटर मिला कर  देने से वह माँ के दूध जितना गुणकारी हो जाता है।
याद रखिए की सिसु के लिए माँ का दूध ही सर्वोत्तम है।

7. सातवीं भूल - दूध पिलाने के समय पैर यदि सिसु सो रहा हो तो उसे जगाना नहीं चाइये।

8. आठवीं भूल - सिसु के रोते  हे उसे चुप करने की कोसिस करनी चाइये। और मुसके मुँह में स्तन या अन्य कोई खादय वास्तु देनी चाइये।
सिसु बदहज्मी ,पेट दर्द या किसी अन्य तकलीफ से भी रोता है।

9.नौवीं  भूल - यह समझना की सिर्फ दूध से क्या होता है। सिसु को कुछ गरिस्ट आहार भी देना चाइये।
जबकि 9 माह तक के बच्चे के लिए दूध पर्याप्त भोजन है। अन्य कुछ देना खतरनाक हो सकता है।

10. दसवी  भूल - यह समझना की ठंडी हवा बच्चे के लिए हानिकारक है। और उन्हें सदैव गर्म जगह में रखना चाइये।
जबकि सच यह की यदि बच्चे का शरीर ढाका हुआ है। तोह ठंडी हवा बच्चे को स्वस्थ व  मजबूत बनाने में बहुत उपयोगी है।



 










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