सोच समझकर कीजिये गर्भावस्था में औषदियों का सेवन

सोच समझकर कीजिये गर्भावस्था में औषदियों का सेवन 




औषदीया आज हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन गयी है। इसलिए यह जानना जरुरी हो गया है की इनका हमारे सरीर पर क्या असर पड़ता है। कितनी गर्भवती स्त्रियां जानती है की कॉफी में मौजूद कैफीन और अधिक मात्रा में पी गयी शराब नवजात सिसु का वजन कम क्र सकती है। यदि कोई स्त्री दिन में कजर से अधिक कप कॉफी या इतने हे गिलास शराब पीती है तो वह अपने बच्चे को पैदा होने से पहले ही सिन्ड्रोम से ग्रष्त कर देगी। ऐसे स्थिति में जन्म लेने के बाद बच्चा कपाल ,चेहरे ,ह्रदय ,अंगो ,मुस्त्राशय या फिर केंद्रीय ,तंत्रिका तंत्र में किसी प्रकार के अनियमतता से ग्रस्त हो सकता है। इसके अतिरिक्त शराब पीने वाली स्त्रियों में गर्भपात की सम्भावनाये बानी रहती है।

यही खतरा विटामिनो पर भी लागु होता है। अधिक मात्रा में विटामिन ए के सेवन से नवजात सिसु के तंत्रिका तंत्र और गुर्दो पर बुरा असर पड़ सकता है। जबकि अधिक विटामिन डी के सेवन से शरीर में अधिक कैल्शियम जमा हो जाता है। जिससे hyperkelsemia हो जाता है। गलत औषदीया खाने से भूख पर भी अनुचित प्रभाव पड़ता है। ऐसा आमतौर पर तब होता है ,जब औरते किसी अन्य रोग के लिए डॉक्टर के पास जाती है और उसे यह नहीं बताती की वह गर्भवती है।

ऐसा भी ही है की गर्भावस्था में दवाई नहीं लेनी चाइये बल्कि सावधान रहना चाइये गर्भवती स्त्रियों को डॉक्टर की सलाह से ही दवाई लेनी चाइये। उदहारण के लिए एस्प्रीन जैसी दवाई के अधिक सेवन से बुरे प्रभाव पड़ते है एस्प्रिन के अलावा पेरासिटामोल ओर सूजन कम करने वाली दवाई बुरा असर डाल सकती है। इनके प्रभाव से होने वाली तकलीफे कुछ इस प्रकार है -प्रशव  पीड़ा के दौरान लम्बे समय तक दर्द रहना ,अधिक खून बहना यह फिर असामन्य रूप से खून का जम जाना। हाल हे में किये गए शोध से पता चला है की इन दवाइयो के सेवन से नवजात सिसु के कपाल में खून बह सकता है। गर्भावस्था के दौरान यदि माँ को मिर्गी की बीमारी का इलाज करवाना पड़ता है तो सिसु अपंग पैदा होगा ऐसा देखा गया है की इस अवस्था में जन्मे बच्चे को ह्रदय रोग ,दिमागी विकास की कमी और होठो के फटने जैसे तकलीफ होती है यह तकलीफ तालु में भी हो सकती है

उच्च रक्तचाप के लिए दी जाने वाली दवाईया गर्भावस्था के दौरान नुक्सान पाउच सकती है आम तोर पर रेस्प्रीन ,केपटोप्रिल और अनलपराल जैसे दवाईया उच्च रक्तचाप के लिए दी जाती है गर्भाव्स्था के दौरान
 का सेवन किया जाये तो नवजात सिसु को नाक में रूकावट यह फिर तंद्रा की शिकायत हो सकती है।
आमतौर पर पहले तीनमहीने में दवाइयां लेने से बच्चे पर  बुरा प्रभाव पड़ता है क्योकि गर्भावस्था के दूसरे हफ्ते तक सिसु के अंग का निर्माण होता है जबकि 6 महीने के बढ़ दवाइया बच्चे के दिमाग पर असर डालती है

बेसक यह बता पाना कठिन है की गर्भवती स्त्री और बच्चे पर किस दवाई का क्या असर पड़  रहा है।
दो हजार वर्ष पूर्व ही इस तथ्य का पता लगाया जा चूका है की गर्भावस्था में कुछ दवाइया माँ और सिसु पर बुरा असर डालती है
कुछ दवाइयो के नाम निचे pdf  फाइल के लिंक में बताये गए है 
https://drive.google.com/open?id=0B1_4GON4s8Y2YVhiQmJIVjA3Qk0

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